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अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता के लिए शुल्क नहीं पाया तय

Dehradun: प्रदेश में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता के लिए नियमावली जारी कर दी गई है लेकिन इनकी मान्यता और नवीनीकरण के लिए विभाग अब तक शुल्क तय नहीं कर पाया है। इससे शैक्षणिक संस्थानों के सामने असमंजस बना है। जबकि राज्य में अगले महीने एक जुलाई से मदरसा बोर्ड समाप्त हो जाएगा।

राज्य में 450 पंजीकृत और करीब 500 अपंजीकृत मदरसे हैं। मदरसा बोर्ड खत्म होने के बाद मदरसों एवं अन्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। इन अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता के बाद हर तीन साल में इसका नवीनीकरण कराना होगा। इनकी मान्यता के लिए जो नियमावली जारी की गई है, उसमें कहा गया है कि शैक्षणिक संस्थान ऑनलाइन आवेदन करेंगे।

आवेदन के साथ निर्धारित शुल्क डिजिटल रूप से ऑनलाइन जमा करना होगा। इसके बाद प्राधिकरण अधिनियम की धारा 14 में सूचीबद्ध शर्तों के अनुसार इनकी मान्यता व नवीनीकरण के लिए किए गए आवेदनों की जांच करेगा। यदि प्राधिकरण जरूरी समझेगा तो शैक्षणिक संस्थानों का निरीक्षण भी करवाएगा।

मान्यता की प्रमुख शर्तें

– शैक्षणिक संस्थान एक अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से स्थापित और संचालित हो।

– शैक्षणिक संस्थान परिषद से संबद्ध हो।

– संस्थान ऐसा कोई कृत्य नहीं करेगा जो सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव के मार्ग में बाधा उत्पन्न करे।

– शैक्षणिक संस्थान परिषद की ओर से निर्धारित योग्यताओं के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति करेगा।

– अपने छात्रों और कर्मचारियों को अपनी किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं करेगा।

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