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पुलिस के व्यवहार की जांच डीआईजी करेंगे

कर्णप्रयाग; कर्णप्रयाग में निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद से संबंधित दोनों प्राथमिकी की विवेचना हरिद्वार ट्रांसफर कर दी गई है। इसके अलावा सिख श्रद्धालुओं से मारपीट और उन्हें बिना दस्तार कोर्ट में पेश करने के आरोपों की जांच डीआईजी यशवंत सिंह को सौंपी गई है। पुलिस मुख्यालय ने उनसे दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

गत 16 जून को कर्णप्रयाग में सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हुआ था। इसमें आरोप था कि एक निहंग सिख ने दूसरे पक्ष के व्यक्ति पर तलवार से वार कर दिया। ऐसे में कर्णप्रयाग कोतवाली में सिख श्रद्धालुओं के खिलाफ जान से मारने की नियत से हमला करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर चार को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद सिख समुदाय ने आरोप लगाए कि सिखों ने यह वार अपनी रक्षा में किया था।

दूसरे पक्ष का कोई मेडिकल नहीं कराया गया और केवल बयानों के आधार पर जानलेवा हमले का आरोप लगा दिया गया। पुलिस मुख्यालय से जारी प्रेस नोट के अनुसार गत 20 जून को गढ़वाल आईजी की संस्तुति पर दूसरे पक्ष के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

अब सिख समुदाय की मांग है कि इन दोनों प्राथमिकी की विवेचना किसी दूसरे जनपद में कराई जाए। ऐसे में पुलिस मुख्यालय ने इन प्राथमिकी की विवेचना चमोली से हरिद्वार ट्रांसफर कर दी और एसएसपी नवनीत भुल्लर को इनका पर्यवेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसी बीच सिख समुदाय का यह आरोप भी था कि कर्णप्रयाग में गिरफ्तार सिखों को बिना दस्तार के नंगे सिर अदालत में पेश किया गया और उनके साथ मारपीट की गई। इन सब मामलों की जांच डीआईजी यशवंत सिंह को सौंपी गई है।

उत्तराखंड पुलिस सभी समुदायों की धार्मिक भावनाओं का आदर करती है। प्रत्येक प्रकरण में कानून के अनुरूप निष्पक्ष, पारदर्शी व न्यायसंगत कार्रवाई के लिए पुलिस प्रतिबद्ध है। हेमकुंड साहिब यात्रा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी अत्यंत पवित्र यात्रा है जो उत्तराखंड पुलिस व प्रशासन के समन्वित प्रयासों से सुरक्षित व शांतिपूर्वक संचालित हो रही है।
– राजीव स्वरूप, आईजी गढ़वाल

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